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उसने मुझे क्या समझ कर छोड़ा
की उसके जाने से टुट कर बिखर जाउँगा ।
कोई जाकर कह दे उनसे की मै वो कोहिनुर पत्थर हू
अगर तोड़ा तो और निखर जाउँगा ।।
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घर से बाहर कोलेज जाने के लिए
वो नकाब मे निकली….
सारी गली उनके पीछे निकली…
इनकार करते थे वो हमारी मोहबत से..
और हमारी ही तसवीर उनकी किताब से निकली…
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मोहबत को जो निभाते हैं उनको मेरा सलाम है,
और जो बीच रास्ते में छोड़ जाते हैं उनको, हुमारा ये पेघाम हैं,
“वादा-ए-वफ़ा करो तो फिर खुद को फ़ना करो,
वरना खुदा के लिए किसी की ज़िंदगी ना तबाह करो”
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वो रात दर्द और सितम की रात होगी,
जिस रात रुखसत उनकी बारात होगी,
उठ जाता हु मैं ये सोचकर नींद से अक्सर,
के एक गैर की बाहों में मेरी सारी कायनात होगी….
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दिल पे क्या गुज़री वो अनजान क्या जाने;
प्यार किसे कहते है वो नादान क्या जाने;
हवा के साथ उड़ गया घर इस परिंदे का;
कैसे बना था घोसला वो तूफान क्या जाने………
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