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आँखों मे आ जाते है आँसू,
फिर भी लबो पे हसी रखनी पड़ती है,
ये मोहब्बत भी क्या चीज़ है यारो,
जिस से करते है उसीसे छुपानी पड़ती है…
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ना मुंह छिपा के जियो और ना सर झुका के जियो
गमों का दौर भी आए तो मुस्कुरा के जियो ।
घटा में छुप के सितारे फना नहीं होते
अंधेरी रात के दिल में दीये जला के जियो ।
ना जाने कौन-सा पल मौत की अमानत हो
हर एक पल की खुशी को गले लगा के जियो ।
ये जिंदगी किसी मंजिल पे रूक नहीं सकती
हर इक मुकाम से आगे कदम बढ़ा के जियो
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जब आपका नाम ज़ुबान पर आता है,
पता नही दिल क्यों मुस्कुराता है,
तसल्ली होती है हमारे दिल को,
कि चलो कोई तो है अपना, जो
हर वक़्त याद आता है.
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रोती हुई आँखो मे इंतेज़ार होता है,
ना चाहते हुए भी प्यार होता है,
क्यू देखते है हम वो सपने,
जिनके टूटने पर भी उनके सच होने
का इंतेज़ार होता है?…..
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मोहबत को जो निभाते हैं उनको मेरा सलाम है,
और जो बीच रास्ते में छोड़ जाते हैं
उनको, हुमारा ये पेघाम हैं,
“वादा-ए-वफ़ा करो
तो फिर खुद को फ़ना करो,
वरना खुदा के लिए किसी की
ज़िंदगी ना तबाह करो”
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हम कहा थे इतने दिनों से …
खुद हमको ही मालूम न था …
ये वक्त भी क्या गुल खिलाती हे
हमको कुछ याद ही नहीं …
ज़िन्दगी के कुछ पल भी अजीब सी
होती है खुद ही सो जाती हे…
जागना चाह तो आंख खुली ही
नहीं जब जागा तो कुछ याद्द ही नहीं …
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