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आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा
कश्ती के मुसाफिर ने समंदर नहीं देखा
पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला
मैं मोम हूँ उसने मुझे छू कर नहीं देखा..
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अब तो तेरे लिये हम अजनबी हो गये
बातों के सिलसिले भी कम हो गये
खुशियो से ज्यादा गम हो गये
क्या पता ये वक्त बुरा हे या बुरे हम हो गये..
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जिनकी आंखें आंसू से नम नहीं
क्या समझते हो उसे कोई गम नहीं
तुम तड़प कर रो दिये तो क्या हुआ
गम छुपा के हंसने वाले भी कम नहीं..
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